झारखंड

रोमी चौक की जलमीनार बनी सरकारी लापरवाही की मिसाल, लगने के बाद आज तक नही ं हुई चालू

Mohan Rana 25 May 2026, 02:48 PM 515 views
रोमी चौक की जलमीनार बनी सरकारी लापरवाही की मिसाल, लगने के बाद आज तक नही ं हुई चालू
“हर घर जल” योजना पर सवाल—लाखों खर्च के बाद भी ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे
सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर जल” योजना के तहत रोमी पंचायत के रोमी चौक में लाखों रुपये की लागत से जलमीनार का निर्माण कराया गया था। इस योजना का उद्देश्य पंचायत क्षेत्र के प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना और वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करना था। जलमीनार निर्माण के दौरान ग्रामीणों को भरोसा दिलाया गया था कि अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और हर घर तक नियमित रूप से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जलमीनार बनकर तैयार हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक इसे विधिवत चालू नहीं किया गया। स्थिति यह है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई यह जलमीनार केवल एक ढांचा बनकर खड़ी है, जिससे लोगों को किसी प्रकार का लाभ नहीं मिल रहा। गांव के विभिन्न हिस्सों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन कई घरों तक नल तक नहीं लगाए गए। जिन स्थानों पर पाइपलाइन पहुंची भी है, वहां आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची। स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं और निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। इससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई लाभ नहीं मिला, जिससे यह योजना अब केवल कागजों और सरकारी दावों तक सीमित होकर रह गई है। पेयजल संकट के कारण आज भी गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे चापाकल, कुएं और अन्य वैकल्पिक जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जलमीनार बनने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब उनके घरों में नियमित पानी पहुंचेगा, लेकिन वर्षों बाद भी उनका यह सपना अधूरा ही है। ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष इस समस्या को उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे लोगों में विभागीय कार्यशैली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, निर्माण कार्य में हुई अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। रोमी चौक की यह जलमीनार अब विकास और योजनाओं के नाम पर किए जा रहे अधूरे कार्यों का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है, जो सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को साफ तौर पर उजागर करती है।